कैंची धाम क्या है? क्यूँ इतना लोग मानते है ? और वहाँ कैसे पहुंचे ?
कैंची धाम मंदिर
कैंची धाम मंदिर में आज जीतने भी लोगों की श्रद्धा जुड़ी है कहीं न कहीं न कहीं उनके मन की मुराद वहाँ पूरी होती होगी इसीलिए कैंची धाम का नाम इतना बड़ा हो गया है । यहाँ के स्थानिय लोग कहते है की कैंची धाम पर जो लोग भी आते है यहाँ विराजमान नीम करौली बाबा उनकी सब लोगों की प्रार्थना स्वीकार करते है और उनके दुखों का निवारण करते है । यहाँ पर लोगों की बहुत भीड़ रहती है क्यूंकी उनकी आस्था नीम करौली बाबा पर बहुत ही अधिक है। यहाँ स्थानिये लोग तो आते ही है देश और विदेश से भी भारी संख्या में लोग यहाँ आते है और कैंची धाम की चमत्कारी शक्तियों का लाभ उठाते है । कैंची धाम मंदिर उत्तराखंड के नैनीताल जिले में है जो की एक पहाड़ी इलाका है ।
कहाँ है कैंची धाम:- कैंची धाम उत्तराखंड के नैनीताल जिले में स्थित है । यह धाम एक ऊंची पहाड़ी पर है नदी के किनारे या कह सकते है के एक चोटी सी धारा जाती है उसके पास से । मंदिर बहुत सुंदर और भव्य बना हुआ है जहां भगवनों के साथ साथ नीम करौली बाबा की भी मूर्ति स्थापित है । नीम करौली बाबा नें इस मंदिर की स्थापना 1964 में की थी । नीम करौली बाबा 1961 में पहली बार यहाँ आए थे उनके एक मित्र थे पूर्णा नन्द जी जिनके साथ उन्होने इस मंदिर को बनाने का विचार विमर्श किया और उनके सहयोग से इस मंदिर का निर्माण किया । मंदिर बनने के बाद नीम करौली बाबा फिर इसी धाम में बस गए और अंत में यहीं समाधि ली ।
लोग इतना क्यूँ मान्यता देते है ?:- बाबा नीम करौली बाबा एक सिधपूरुष थे और भगवान हनुमानजी के बहुत बड़े भक्त थे । बहुत से भक्त तो उन्हे हनुमान जी के भक्त मानते थे क्यूंकी भगवान ने उनके उपर विशेष कृपा बिखेर राखी थी । जब भी कोई आता था यहाँ पर अपनी परेशनीया लेकर के तो खुद बाबा उनके उन सब दुख दरदों को दूर करने का उपाय बताया करते थे । कहते है के जब वो किसी को भी उपाय बताते थे तो शाक्षात उनके शब्द हनुमान जी के शब्द ही होते थे ।
नीम करौली बाबा के दर्शन के लिए यहाँ पर देश तो लोग आते ही थे लेकिन विदेशों से भी लोग आते थे । जिनमे एप्पल के मालिक स्टीव जॉब , फेसबुक के मालिक मार्क जुकरबर्ग, होलीवूड स्टार जूलिया रॉबर्ट्स तथा अभी हाल में इंडियन क्रिकेट टीम के खिलाड़ी विराट कोहली और उनकी पत्नी अनुष्का शर्मा भी आए थे । कहा जाता है के इन सब ने ही कहा था के उनसे मिलकर और इस धाम में आने मात्र से हे हमारे जीवन की सभी प्रोब्लेम सॉल्व हो गयी और हमारा जीवन बादल गया । रिचर्ड अल्बर्ट (रामदास ) ने अपनी किताब "मिरेकल ऑफ लव" किताब में एक "बुलेटप्रूफ कंबल" नाम की घटना का भी जीकर किया गया है। जब से यहाँ अनुष्का शर्मा और विराट कोहली गए है तब से ये सुबरा चर्चाओं में अगया है । यहाँ पर 15 जून को एक मैले का आयोजन होता है और यहाँ देश विदेश से बाबा के हजारों भक्त आते है । देश से और विदेश से लोग यहाँ हनुमान जी का आशीर्वाद लेने आते है । बाबा के भक्तों ने यहाँ पर हनुमान जी का भव्य मंदिर बनवाया है यहाँ पर 5 देवी देवताओं के मंदिर है । इनमे हनुमान जी का एक मंदिर है बाबा नीम करौली हनुमान जी एक बहुत बड़े भक्त थे जिस कारण उनको हनुमान जी का अवतार भी कहा जाता है । बाबा नीम करौली बाबा जी ने देश भर में हनुमान जी के कई मंदिर बनवाए ।
नीम करौली बाबा
नीम करौली बाबा कौन थे ?:- नीम करौली बाबा जी का जन्म सन 1900 में अकबरपुर ( फिरोजाबाद जिला ) उत्तरप्रदेश भारत में हुआ था । बाबा जी धर्म से हिन्दू थे , भारत मे जन्मे बाबा जी को भक्ति योग , सेवा में बहुत अधिक रुचि थी । बाबा जी का नाम लक्ष्मण नारायण शर्मा था , इनका जन्म एक धनी ब्राह्मण परिवार में हुआ था । इनके माता पिता द्वारा इनका विवाह बचपन (11 वर्ष ) में ही करा दिया गया था , इन्होंने इसके पश्चात अपना घर छोड़ दिया था , तथा एक साधु के रूप में अपना जीवन जीना शुरू कर दिया था । ततपश्चात बाद में उनके माता पिता के अनुरोध पर वे वापस घर लौटे और अच्छे से विवाहित जीवन जीने लगे , बाद में उन्हे ईश्वर की कृपा से दो बेटे और एक बेटी भी हुई ।
नीम करौली बाबा जी को मात्र 17 वर्ष की उम्र में ही भगवान का ज्ञान प्राप्त हो गया था , उन्हें इस जीवन के बारे में और आत्मा और परमात्मा के बारे में सम्पूर्ण ज्ञान प्राप्त हो गया था । हनुमान जी को वे अपना गुरु मानते थे , जिस कारण हनुमान जी की भी उनके ऊपर कृपा थी , जिस कारण नीम करौली बाबा जी ने अपने सम्पूर्ण जीवन में हनुमान जी के 108 मंदिर बनवाए थे । माना जाता है , कि हनुमान जी उनके ऊपर कृपा होने के करना बाबा जी को हनुमान जी की अनेक सिद्धियाँ प्राप्त थी । नीम करौली बाबा जी का समाधि स्थल नैनीताल के पास पंतनगर में स्थित है , माना जाता है , कि जो भी भक्त यहाँ पर सच्चे मन और श्रद्धा से अपनी मानोकामनाओं को लेकर जाता है , उसकी मनोकामना पूर्ण हो जाती है । पंतनगर में बाबा जी का समाधि स्थल है , और यहीं पर बाबा जी की एक भव्य मूर्ति भी बनाई गई है ।
फिर आप लोग जब गढ़ को पार कर लेंगे फिर आप आगे बढंगे मुरादाबाद के लिए मुरादाबाद भी बहुत पूराना शहर है ये उत्तर प्रदेश में पीतल की नागरी के नाम से प्रसिद्ध है अगर आप यहाँ आरहे है तो एक बार यहाँ पर से पीतल के समान को आप खरीद सकते है। यहाँ पर पीतल में तरह तरह के वर्ल्ड लेवेल के पीतल के बर्तन मूर्तियाँ और बहुत सी चीजें बनाई जाती है । हापुर से पहले ही यदि आप लोगों को लगता है के आपको रुकना है रेस्ट करना है या खाना है तो उससे पहले एक तो आपको शिवा ढाबा मिल जाएगा जो की आरिजिनल शिवा ढाबा है या फिर उससे 20 से 35 km आगे जब आप जाएंगे तो चाचा चौधरी ढाबा मिलेगा । उसका खाना साफ सफाई भी अच्छी है । हम जब गए थे तो हमने उनके यहाँ पर ही खाया था उसकी एक वजह भी थी क्यूंकी में कोशिश करता हूँ के जब भी में खाना खाऊँ तो ऐसे ढाबे में खाता हूँ जहां ट्रक वाले खाते है उसका कारण ये है के जहां ये लोग खाते है उस होटल वाले को खाने की गुणवत्ता और साफ सफाई में ज्यादा ध्यान देना पड़ता है और सबसे बड़ी बाद उसके यहाँ की सभी सब्जियां ताजी होती है खाना भी बहुत अच्छा होता है ।
फिर वहाँ से आप फ्रेश होकर निकलेंगे तो आपका मुरादाबाद शहर आजाएगा और आपको उसको पार कर लेना है वहाँ पर से जब आगे चलेंगे तो रामपुर से एक जिला आता है उससे कुछ पहले एक रास्ता उल्टे हाथ पर काटता है जो की रुद्रपुर जाता है या तो आप उस रास्ते से जा सकते है अगर आप उसस रास्ते से नहीं जाना चाहते है तो आप रामपुर से होते हुये भी जा सकते है लेकिन उसके बाद बरेली शहर भी आता है और वो रास्ता लंबा पड़ता है । जबकि रामपुर से पहले जो रास्ता पड़ता है न जिससे रुद्रपुर जाते है आप उस रास्ते से जल्दी पहुँच सकते है । और वो रास्ता जंगल से होकर जाता है तो आपको वहाँ जाना और भी अच लगेगा। उस रास्ते से आप होते हुये हल्द्वानी पहुंचेंगे और इस बीच वहाँ बहुत से होटल आएंगे जहां आप चाय और बिस्कुट का मजा ले सकते है और नजरें भी देख सकते है या फिर स्टे भी कर सकते है वहाँ पर आपको सस्ते में होटल मिल जाएंगे और वहाँ पर लाइट भी नहीं जाती है । क्यूंकी हमने काठ गोदाम से आगे होटल लिया था जो की महंगा भी था और वहाँ रात में लाइट भी चली गयी थी । फिर आप हल्द्वानी से जब आगे जाएंगे तो आपको काठगोदाम मिलेगा जो की लास्ट स्टेशन है ट्रेन का उससे उपर ट्रेन नहीं जाती है । काठ गोदाम से आगे का रास्ता नैनीताल का है जहां से आप आगे जाएंगे तो नानीताल के लिए रास्ता मिलेगा उस रास्ते पर चलते हुये फिर आपको नैनीताल नहीं जाना है आपको जाना है भीम ताल वाले रास्ते में उसी रास्ते पर आपको नीम करौली बाबा जी का मंदिर मिलेगा । वहाँ भी बहुत से रैस्टौरेंट खुल चुके है लेकिन वहाँ का खाना में ये नहीं कहता के बुरा होगा लेकिन वो लोग अच नहीं बनाते है बस कच्चा परांठा भी दे देते है और पूछो तो कहते है के ज़्यस्द्स सेकेंगे तो जल जाएगा। लेकिन आप लोग देख के खाना कुछ भी खाना फिर आप वही गाड़ी पार्क कर सकते है पार्किंग है वहाँ पर और आप फिर प्रशाद लीजिये और मंदिर में जाएँ आपकी यात्रा यहीं समाप्त होती है ।



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